आँख ईश्वर द्वारा प्रदत्त एक अमूल्य उपहार –


आँख ईश्वर द्वारा प्रदत्त एक अमूल्य उपहार  –

शरीर की सारी इन्द्रियों में आँख सबसे नाजुक अमूल्य मानी गई है ! रोजमर्रा की जिंदगी में कंप्यूटर और स्मार्टफोन के बढ़ते इस्तेमाल से आपकी आंखों को हर रोज कुछ कुछ क्षति पहुंचती है। आंखों को बीमारियों से बचाने के लिए उनकी देखभाल जरूरी हो जाती है। यदि आंखों की ठीक प्रकार से देखभाल की जाए तो आंखों से सम्बंधित अधिकतर रोगों से बचा जा सकता है और सबसे अच्छी बात यह है कि अधिकतर उपाय हम घर पर कर सकते हैं।

नेत्र सँरचना -

आंख कई छोटे हिस्सों से बनी एक जटिल ग्रन्थि है, जिनमें से प्रत्येक हिस्सा सामान्य दृष्टि हेतु अनिवार्य है। साफ देखपाने की क्षमता इस बात पर निर्भर करती है कि ये हिस्से परस्पर कितने बेहतर तरीके से काम करते हैं। दृष्टि, एक छवि बनाने के लिए दोनों आँखों के परस्पर उपयोग की क्षमता होती है। सटीक दृष्टि के लिए दोनों आँखें एक साथ आसानी से सटीक एवं बराबर काम करती हैं।

आँखों से जुडे कुछ रोचक तथ्य –

·         वर्तमान में 3.7 करोड़ लोग दृष्टिहीन हैं एवं 12.4 करोड़ लोग गंभीर रूप से दृष्टि-विकार से पीड़ित हैं।
·         दृष्टिहीनता उत्पन्न करनेवाली स्थितियों के बचाव या त्वरित उपचार से 80 प्रतिशत मामलों में अन्धवत्व‍ से बचा जा सकता है।
·         विश्व के नब्बे प्रतिशत दृष्टिहीन लोग विकासशील देशों में रहते हैं।
·         विश्वभर के दृष्टिहीनों में दो-तिहाई से अधिक महिलाएं हैं।
·         विश्व के एक-चौथाई दृष्टिहीन लोग भारत में रहते हैं; अर्थात्, 9-12 लाख लोग
·         लगभग 70 प्रतिशत दृष्टिहीन लोग भारत में ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं जहां आँखों की अच्छी देखभाल उपलब्ध नहीं है।यदि प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो अंधत्व तथा दृष्टिहीनता से पीड़ित लोगों की संख्या वर्ष 2020 तक दुगुनी हो जाएगी।




आँखों से जुडी कुछ सामान्य बीमारियाँ –

·         मोतियाबिंद
·         अपवर्तक त्रुटि
·         आँख की जन्मजात असंगति
·         ऑप्टिक एट्रॉफी
·         कॉर्निअल रोग
·         कांचबिंदु
·         रेटिनल रोग
·         एम्ब्लिओपिक
·         अन्‍य (सजातीय विवाह, आघात, आदि)

यह देखा जा सकता है कि मोतियाबिंद, अंधत्‍व का सबसे बड़ा कारण है, तथा अपवर्तक त्रुटि दृष्टि की क्षीणता का सबसे बड़ा कारण है। इनके अलावा आंख की जन्मजात विसंगति, ऑप्टिक एटगॉफी, कॉर्निअल रोग,कांचबिंदु, रेटिनल रोग, एम्ब्लिओपिक अंधत्‍व या दृष्टि की क्षीणता के कारण होना पाये गये हैं।
मोतियाबिंद एवं अपवर्तक त्रुटि अंधत्‍व एवं दृष्टि की क्षीणता के सबसे बड़ा कारण होते हैं। इन परिस्थितियों को रोका नहीं जा सकता, लेकिन मोतियाबिंद के मामले में एक इन छोटे से ऑपरेशन द्वारा दृष्टि को फिर चंगा किया जा सकता हैं, एवं अपवर्तक त्रुटि के लिए चश्मे देकर। अंधत्‍व एवं दृष्टि की क्षीणता के इन रूपों का उपचार, सभी स्‍वास्‍थ्‍य उपचारों में से सर्वाधिक सफल एवं सस्‍ता है।
इनके कई कारणों में से एक है- आंख की देखभाल कि उचित सेवाएं उपलब्‍ध न होना या आवश्‍यकतानुसार प्रशिक्षित देखभाल करने वाले उपलब्‍ध न हों। कभी-कभी देखभाल पर आने वाली खर्च की वजह से लोग आंख देखभाल की उपलब्ध सेवाओं का लाभ नहीं ले पाते या फिर दूर स्थित आंख देखभाल केन्‍द्रों तक आवागमन पर होने वाले खर्च के कारण वहाँ जाने से हिचकते हैं। कभी-कभी वे कमजोर दृष्टि को यह सोचकर स्वीकार कर लेते हैं कि वे जैसे –तैसे काम चला लेगें, यह विशेषत: बूढ़े या अधिक उम्र के व्‍यक्तियों पर लागू होता है।

मोतियाबिंद

आंखों के लेंस आँख से विभिन्‍न दूरियों की वस्तुओं पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है। समय के साथ लेंस अपनी पारदर्शिता खो देता है तथा अपारदर्शी हो जाता है। लेंस के धुंधलेपन को मोतियाबिंद कहा जाता है। दृष्टिपटल तक प्रकाश नहीं पहुँच पाता है एवं धीरे-धीरे दृष्टि में कमी अन्धता के बिंदु तक हो जाती है। ज्यादातर लोगों में अंतिम परिणाम धुंधलापन एवं विकृत दृष्टि होते है।
हालांकि आमतौर पर 55 वर्ष की आयु से अधिक के लोगों में मोतियाबिंद होता है, युवा लोग भी इससे प्रतिरक्षित नहीं हैं। मोतियाबिंद दुनिया भर में अंधत्‍व के मुख्य कारण हैं। 60 से अधिक आयु वालों में 10 में से चार लोगों में मोतियाबिंद विकसित होता है। शल्‍य क्रिया ही इसका एकमात्र इलाज़ है, जो सुरक्षित एवं आसान प्रक्रिया है।
मोतियाबिंद का निश्चित कारण पता नहीं है। मोतियाबिंद के विभिन्न प्रकार होते हैं,
सबसे आम वृद्धावस्था का मोतियाबिंद है, जो 50 से अधिक आयु वाले लोगों में विकसित होता है। इस परिवर्तन में योगदान देने वाले कारकों में रोग, आनुवांशिकी, बुढ़ापा, या नेत्र की चोट शामिल है। वे लोग जो सिगरेट के धुएँ, पराबैंगनी विकिरण(सूर्य के प्रकाश सहित), या कुछ दवाएं के सम्पर्क मे रह्ते हैं, उन्हें भी मोतियाबिंद होने का खतरा होता है। मुक्त कण और ऑक्सीकरण एजेंट्स भी आयु-संबंधी मोतियाबिंद के होने से जुड़े हैं।

लक्षण

·         समय के साथ दृष्टि में क्रमिक गिरावट
·         वस्‍तुयें धुंधली, विकृत, पीली या अस्‍पष्‍ट दिखाई देती हैं।
·         रात में अथवा कम रोशनी में दृष्टि में कमी होना। रात में रंग मलिन दिखाई दे सकते हैं या रात की दृष्टि कमजोर हो सकती है।
·         धूप या तेज रोशनी में दृष्टि चमक से प्रभावित होती है।
·         चमकदार रोशनी के चारों ओर कुण्‍डल दिखाई देते हैं।
·         मोतियाबिंद से खुजली,आंसू आना या सिर दर्द नहीं होता है।
उपचार

वर्तमान में लेंस की पारदर्शिता को पुनर्स्थापित करने वाली कोई भी दवा उपलब्ध नहीं है। चश्मे मदद नहीं कर पाते क्‍योंकि प्रकाश की किरणें आंखों से पारित नहीं हो पाती हैं। शल्यक्रिया के द्वारा हटाना ही मोतियाबिंद के इलाज का एकमात्र तरीका है। मोतियाबिंद सर्जरी के विभिन्‍न प्रकार होते हैं। यदि दृष्टि केवल कुछ धुंधली हो तो मोतियाबिंद का इलाज करने की आवश्यकता नहीं होती है। बस चश्मे बदलने से दृष्टि के सुधार में मदद मिलती है, लेकिन केवल थोड़े समय के लिए। सर्जरी तब करनी चाहिए जब मरीज को अपनी पसंद की चीजें करने के लिए पर्याप्त दिखाई न दें।

आँख के स्वास्थ्य की अच्छी आदतें एवं प्राथमिक उपचार -

·         आँखें एवं आंख के आसपास की त्वचा को साबुन और साफ पानी से धोकर साफ रखें।
·         सोने से पहले आंखों को धोना आवश्यक है क्‍योंकि इससे पूरे दिन में एकत्रित धूल एवं गंदगी हट जाती है।
·         कभी भी दूसरे व्यक्ति का तौलिया, रुमाल या उपयोग किए हुए कपड़े का उपयोग अपनी आंखों को पोछने के लिये प्रयोग न करें क्योंकि इससे संक्रमण हो सकता है।
·         काजल या सूरमा या अन्य सामग्री आँखों में उपयोग करने से बचें। यदि आप इनका उपयोग करते हैं तो प्रत्येक व्यक्ति को यह लगाने के लिये अपना-अपना साधन उपयोग करना चाहिए।
·         आँखो को धूल, धुएँ या बहुत तेज प्रकाश से बचाएं।
·         सूर्य-ग्रहण नग्न आँखों से न देखें।
·         मक्खियां संक्रमित व्यक्तियों से स्वस्थ व्यक्तियों में बीमारियाँ फैलाती हैं। अपने वातावरण को साफ रखें।
·         मधुमेह और उच्च रक्तचाप दृष्टि को क्षति पहुंचा सकते हैं एवं अंधत्‍व ला सकते हैं। उन्‍हें नियंत्रण में रखिये, अपनी आँखों की जाँच समय-समय पर कराएं।
·         सभी जहरीले ड्रग्स, शराब और तंबाकू स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं, आँखों के लिए तो और भी ज़्यादा। ऐसी चीजों से बचें।
·         बच्चों को खतरनाक खेलने वाली चीजें जैसे धनुष-बाण, गिल्ली डंडा एवं नुकीले, तेज़ किनारों वाले खिलौनों से दूर रखें। वयस्को की देख-रेख के बिना बच्चों को पटाखों के साथ खेलने से हतोत्साहित करें।
·         वेल्डिंग और बढ़ईगिरी जैसे कार्य करते समय सुरक्षात्मक चश्मे का उपयोग करें।
·         स्वयं दवा लेने से बचें। नीम-हकीम या सड़क किनारे दवा विक्रेताओं द्वारा बेचे जाने वाली दवा का उपयोग न करें। यदि आपको कोई नजर की समस्या हो तो नेत्र विशेषज्ञ से परामर्श करें।
·         यदि आप चश्मे का उपयोग करते हैं, उन्हें साफ तथा खरोंचों से मुक्त रखें। कभी भी अन्य लोगों के काले चश्मे का उपयोग न करें क्योंकि इससे आंख में संक्रमण हो सकता है।
·         एक-दूसरे की आँखों को छूने के द्वारा रोग के संचरण को रोकने के लिए बच्चों को लुका-छिपी का खेल खेलने से हतोत्साहित करें।
·         खाना पकाते समय सोडा का उपयोग से बचें क्योंकि यह विटामिन को नष्ट कर देता है।

पढ़ने की अच्छी आदतें –
·         मुद्रित पृष्ठ को आँखों से डेढ़ फीट दूर एवं 45 से 70 डिग्री के कोण पर झुकाकर पकड़ें।
·         चलती ट्रेन एवं बसों में लेटे हुए या टिमटिमाते/ धुंधले प्रकाश में नहीं पढ़ें।
·         अपर्याप्त रोशनी में बारीक प्रिंट न पढ़ें।
·         पढ़ते या आँखों को जोर देने वाले कार्य करते समय बारम्‍बार आँखें बंद करके या एक मिनट के लिए दूर की वस्तु को देखकर अपनी आँखों को आराम दें।

नेत्र सँवन्धित महत्वपूर्ण सँस्थान -
1.       गोमाबाई नेत्रालय नीमच (http://gomabainetralaya.org)
2.       जानकीकुन्ड नेत्र चिकित्सालय चित्रकूट​ (+(91)-7670-265320)
3.       आनँदपुर आई ट्रस्ट ग्वालियर​ ( 096693 84692)
4.       श्री सदगुरु सेवा सँघ ट्रस्ट मुँबई
इन सभी सँस्थानों में आँखों से जुडी सारी बीमारियों क इलाज मुफ़्त य बहुत ही किफ़ायती दामों पर उपलब्ध है  !





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