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अक्षय तृतीया(परशुराम जयन्ती)

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   अस्यां तिथौ क्षयमुर्पति हुतं न दत्तं। तेनाक्षयेति कथिता मुनिभिस्तृतीया॥          उद्दिष्य दैवतपितृन्क्रियते मनुष्यैः। तत् च अक्षयं भवति भारत सर्वमेव॥ अक्षय तृतीया महत्व - ​                           अक्षय तृतीया या आखा तीज और अखतीज​ वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को कहते हैं। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन जो भी शुभ कार्य किये जाते हैं, उनका अक्षय ( कभी न खत्म होने बाला ) फल मिलता है। इसी कारण इसे अक्षय तृतीया कहा जाता है । । इसे चिरंजीवी तिथि भी कहते हैं, क्योंकि यह तिथि 8 चिरंजीवियों में एक भगवान परशुराम की जन्म तिथि भी है। हिंदू धर्म मान्यताओं में किसी भी शुभ काम के लिए साल के 4  (अक्षय तृतीया ,देवउठनी एकादशी, वसंत पंचमी व भड़ली नवमी ) स्वयं सिद्ध मुहूर्तों में आखा तीज भी एक है।             भविष्य पुराण के अनुसार इस तिथि की युगादि तिथियों में गणना होती है, सतयुग और त्रेता युग का प्रारंभ इसी तिथि से हुआ है , भगवान विष्ण...