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Showing posts from 2016

अक्षय तृतीया(परशुराम जयन्ती)

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   अस्यां तिथौ क्षयमुर्पति हुतं न दत्तं। तेनाक्षयेति कथिता मुनिभिस्तृतीया॥          उद्दिष्य दैवतपितृन्क्रियते मनुष्यैः। तत् च अक्षयं भवति भारत सर्वमेव॥ अक्षय तृतीया महत्व - ​                           अक्षय तृतीया या आखा तीज और अखतीज​ वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को कहते हैं। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन जो भी शुभ कार्य किये जाते हैं, उनका अक्षय ( कभी न खत्म होने बाला ) फल मिलता है। इसी कारण इसे अक्षय तृतीया कहा जाता है । । इसे चिरंजीवी तिथि भी कहते हैं, क्योंकि यह तिथि 8 चिरंजीवियों में एक भगवान परशुराम की जन्म तिथि भी है। हिंदू धर्म मान्यताओं में किसी भी शुभ काम के लिए साल के 4  (अक्षय तृतीया ,देवउठनी एकादशी, वसंत पंचमी व भड़ली नवमी ) स्वयं सिद्ध मुहूर्तों में आखा तीज भी एक है।             भविष्य पुराण के अनुसार इस तिथि की युगादि तिथियों में गणना होती है, सतयुग और त्रेता युग का प्रारंभ इसी तिथि से हुआ है , भगवान विष्ण...

महान योद्धा बार्बरीक (खाटु के श्याम जी )

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                              हारे के सहारे श्री खाटु श्याम जी हमारे  ।।                                   बहुत ही कम लोगों को पता होगा महाभारत में एक ऐसा भी योद्धा था ,जो महाभारत के युध्द को सिर्फ़ 1 मिनिट में खत्म करने की शक्ति रखता था और वह थे बारबरीक । बारबरीक घटोत्कक्ष के पुत्र थे और इसी नाते भीम के पौत्र भी हुए । आज हम इन्हे खाटु के श्याम जी के नाम से जानते हें । राजस्थान में बडा ही भव्य मँदिर हे खाटुश्याम जी क जन्हा सच्चे मन से प्रार्थना करने से सारी समस्याओं क समाधान होता हे । बर्बरीक श्री कृष्ण सँवाद -                                      बर्बरीक को बचपन से ही अस्त्र स्श्स्त्र और युद्ध कला से बडा प्रेम था , बचपन में ही बर्बरीक ने सारी युध्द विद्या अपनी माँ से सीख ली थी और​ उसने अपनी मां को युद्ध में कम...

औरछा (राम राजा की नगरी)

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औरछा (राम राजा की नगरी)  -                   मधुकर शाह महाराज की रानी कुँवर गनेश ,                       अवधपुरी से औरछा लाईं अवध नरेश ॥                   औरछा नगर को 16 वीं शताब्दी में बुँदेला राजा रुद्र प्रताप सिंह ने बसाया था , औरछा आने के लिए ट्रैन और बस दोनो आसानी से उपलब्ध हें , फ़्लाइट के लिए ग्वालियर (119 km) सबसे पास क एयरपोर्ट  हे । । ट्रैन से आने के लिए मध्य रैलवे के झाँसी जँ. पर उतरना होगा जो कि देल्ही से 6 घँटे की दूरी पर हे , देल्ही मुँबई रूट की सारी ट्रैन यहाँ रुकती हें । झाँसी से औरछा की दूरी 15 किमी होगी जिसके लिए झाँसी से बस और टेक्सी दोनो उपलब्ध हें । रुकने के लिए ओरछा में ही अच्छे होटल आसानी से मिल जाते हें । बुँदेलखँड के इतिहास में औरछा क अलग ही स्थान हे , यह नगर बुँदेला राजाओं की राजधानी हुआ करती थी । यँहा के महलों में मुगलों और राजपूतों दोनों की वास्तुकला क मिला जुला सँगम देखने को मिलता हे । यँहा प...

मथुरा गोवर्धन परिक्रमा

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मथुरा  गोवर्धन परिक्रमा -                   चलो सखी वहाँ जाइए जहाँ बसत गिरिराज ,                गोरख बेचत हरि मिलें एक पँत दोउ काज ॥           बचपन से यह आरती सुनता आ रहा हुँ और तब से ही मन में गिरिराज (गोवर्धन पर्वत) को देखने की इच्छा थी , अब जाकर वह समय आया हे , गोवर्धन पर्वत मथुरा रेलवे स्टेशन से लगभग २०-२२ किमी की दूरी पर हे , जाने के लिए रेलवे स्टेशन से पब्लिक (25 -30 रु) और पर्शनल (२००-३०० रु) दोनों ट्राँस्पोर्ट   आसानी से उपलब्ध हो जाते हें , गोवर्धन परिक्रमा का अपना अलग ही पौराडिक महत्व हे , कहते हें जब श्री क्रष्ण ने गोकुल वासियों को इन्द्र के प्रकोप से बचाया , तब ग्राम वासियों ने गिरिराज जी कि परिक्रमा की , और तब से आज तक सारे भारत वर्ष के लोग यहाँ आते हें और इस पवित्र पर्वत की परिक्रमा करते हें | पूरी परिक्रमा   21  किमी की हे , सुविधा के लिए 9 किमी कि एक छोटी परिक्रमा भी हे , श्रधालू अपने शारीरिक और मानसिक सामर्थ अनुसार कोई भी एक चुन ...